Two words that come to mind when I listen to this song - intoxicating and romantic! Again, this one too falls under the "taareef karofy" category. The song has that laid back feeling to it, you get to listen to music and the singer's voice and enjoy and appreciate each and every note of the music and word of lyrics. It's too bad they don't make slow songs like this one these days. Wonderful to hear such slow song in our fast paced life where we are just running to God knows where...
(आप के हसीन रूख पे आज नया नूर है
मेरा दील मचल गया तो मेरा क्या कसूर है) (२)
आप की निगाह ने कहा तो कुछ ज़रूर है
मेरा दील मचल गया तो मेरा क्या कसूर है
खुली लटों की छाँव में खिला खिला येह रूप है (२)
घटा से जैसे छन रही सुबह सुबह की धूप है
जिधर नज़र मूडी (३) उधर सुरूर ही सुरूर है
मेरा दील मचल गया तो मेरा क्या कसूर है
आप के हसीन रूख पे आज नया नूर है
मेरा दील मचल गया तो मेरा क्या कसूर है
झुकी झुकी निगाह में भी है बला की शोखियाँ (२)
दबी दबी हंसी में भी तड़प रही है बिजलियाँ
शबाब आप का (३) नशे में खुद ही चूर चूर है
मेरा दील मचल गया तो मेरा क्या कसूर है
आप की निगाह ने कहा तो कुछ ज़रूर है
मेरा दील मचल गया तो मेरा क्या कसूर है
जहाँ जहाँ पड़े कदम वहाँ फिजा बदल गयी (२)
के जैसे सर्बसर बहार आप ही में ढल गयी
किसी में यह कशिश (३) कहाँ जो आप में हुज़ूर है
मेरा दील मचल गया तो मेरा क्या कसूर है
आप के हसीं रूख पे आज नया नूर है
मेरा दील मचल गया तो मेरा क्या कसूर है
आप की निगाह ने कहा तो कुछ ज़रूर है
मेरा दील मचल गया तो मेरा क्या कसूर है
Film: Baharen Phir Bhi Aayengi (1966)
Singer: Mohd. Rafi
Music Director: O. P. Nayyar
Lyrics: Anjaan
Picturized on: Tanuja, Mala Sinha, Dharmendra, Rehman, Deven Verma